Sunday, March 23, 2008

नीरज की प्रतिनिधि कविताओं में एक-मुझे न करना याद तुम्हारा आँगन गीला हो जाएगा।

नीरज के फिल्मी गीत तथा उनके नॉन फिल्मी गीतों को समानांतर रूप से साथ ले कर चलें तो अधिक मज़ा आयेगा शायद.... अतः उनके गीतों की श्रृंखला में प्रस्तुत है उनका एक बहुचर्चित गीत



मुझे न करना याद तुम्हारा आँगन गीला हो जाएगा,

रोज रात को नींद चुरा ले जाएगी पपिहों की टोली,
रोज प्रात को पीर जगाने आएगी कोयल की बोली।
रोज दुपहरी में तुम से कुछ कथा कहेंगी सूनी गलियाँ,
रोज साँझ को आँख भिगो जायेगी वे मुरझाई कलियाँ।
यह सब होगा पर न दुखी होना तुम मेरी मुक्त केशिनी

तुम सिसकोगी वहाँ, यहाँ यह पग बोझीला हो जाएगा
मुझे न करना याद तुम्हारा आँगन गीला हो जाएगा।

कभी लगेगा तुम्हें कि जैसे दूर कहीं गाता हो कोई,
कभी तुम्हें मालूम पड़ेगा आँचल छू जाता हो कोई,
कभी सुनोगो तुम कि कहीं से किसी दिशा ने तुम्हे पुकारा,
कभी दिखेगा तुम्हे कि जैसे बात कर रहा हो हर तारा।
पर ना तड़पना पर ना बिलखना, पर ना आँख भर लाना तुम,

तुम्हे तड़फता देख विरह शुक और हठीला हो जाएगा
मुझे न करना याद तुम्हारा आँगन गीला हो जाएगा।

याद सुखद बस जगा में उसकी, हो कर भी जो दूर पास हो,
किंतु व्यर्थ उसकी सुधि करना जिसके मिलने की न आस हो।
मैं अब इतनी दूर कि जितनी, सागर से मरुथल की दूरी,
और अभी क्या ठीक कहाँ ले जाएं जीवन की मजबूरी
गीत हंस के साथ इसलिये मुझको मत भेजना संदेशा,

मुझको मिटता देख, तुम्हारा स्वर दर्दीला हो जाएगा
मुझे न करना याद तुम्हारा आँगन गीला हो जाएगा।

मैने कब यह चाहा मुझको याद करो, जग को तुम भूलो,
मेरी यही रही ख्वाहिश, बस मै जिस जगह झरूँ तुम फूलो,
शूल मुझे दो, जिससे वह चुभ सके न किसी अन्य के पग में
और फूल जाऔ, ले जाऔ, बिखराओ जन जन के मग में,
यही प्रेम की रीत कि सब कुछ देता किंतु न कुछ लेता है,

यदि तुम ने कुछ दिया, प्रेम का बंधन ढीला हो जाएगा
मुझे न करना याद तुम्हारा आँगन गीला हो जाएगा।

5 comments:

sidheshwer said...

बहुत सुंदर.
नीरज जी कविताओं के पाठकों की एक लंबी कतार है,मैं खुद उसी कतार का एक हिस्सा मानते हुए आपकॆ प्रति आभारी हूं कि निरंतर मेरे प्रिय कवि को प्रस्तुत कर रही हैं.
राही मसूम रजा और नीरज के शहरनामा पर मेरी एक पोस्ट है,यदि नजर न आई हो तो देख लें,शायद ठीक लगे-

http://kabaadkhaana.blogspot.com/2007/12/blog-post_26.html

मीनाक्षी said...

यही प्रेम की रीत कि सब कुछ देता किंतु न कुछ लेता है --- बहुत सुन्दर भाव

नीरज जी के प्रशंसकों मे से एक हम भी हैं.

सुनीता शानू said...

हम भी कायल है नीरज जी के...बहुत सुन्दर! आप सुनाती रहिये हम आते रहेंगे...:)

swati said...

shukriya

कुमार नवीन said...

नीरज जी का मैं पिछले 20 वर्षो से प्रशंसक हूं, उनका गीत प्रकाशित करने के लिए आभार -
कुमार नवीन,पटना