
अभी जैसे कल ही की तो बात है जब इधर मेरा बी०ए० का परिणाम आया था और उधर मेरी ये भतीजी जो फोटो में है, आने की तैयारी में थी .....! अभी तो हम इसे ही कविता समझ रहे थे..अचानक इसमें कहाँ से कविता करने के भावों का अंकुरण हो गया....? बात करना इसने बहुत जल्दी सीखा था। भावुक वो शुरू से ही है..! मुझे उस जैसा कोई लगता भी नही था ..इसलिये मैने उसे नाम दिया अनन्या ... घर मे उसे सब हिमांशी बुलाते है... अभी जुलाई में हमने उसका १० वाँ जन्मदिन मनाया है...!
पिछले कुछ महीनो से माँ सरस्वती के आशीर्वाद से वो कविता करने लगी है....! उसकी ये प्रतिभा सकारात्मक रूप से पुष्पित पल्लवित हो इस हेतु जरूरत है आप सबके आशीर्वाद की.... !
पढ़िये उसकी आड़ी बेड़ी भावनाएं... उसी के तरीके से बिना किसी प्रकार के संपादन किये हुए...! और दीजिये उन्हें नियमित, संयमित और विचारशील होने का आशीर्वाद
1
बचपन में जिस माँ ने तुझे चलना सिखया था,
आज उसी माँ को चलाने का वक्त आया था....!
बचपन में जो सिखाती थी तुझको चलना
आज तुम्ही ने शुरू किया उसे छलना...!
आज तुम्ही ने शुरू किया उसे छलना...!
अगर दूध का कर्ज़ न चुकाया होता,
तो कम से कम बेटे का फर्ज़ तो निभाया होता।
तो कम से कम बेटे का फर्ज़ तो निभाया होता।
माँ का अर्थ तुम क्या जानो वो तो माँ ही जानती है,
माँ ही एक माँ, बेटी और दोस्त का फर्ज़ पहचानती है।
छुपन छुपाई में भी तू अगर छिप जाता था,
तो भी माँ का बुरा हाल हो जाता था,
दरवाजे पर बैठ कर जो करती तेरा इंतजार,
उसी दरवाजे से निकाला तूने उसको और सोचा भी ना एक बार।
बचपन में तुम्हारे लिये जिसने इतना दुःख झेला,
उसी माँ को समझता है, अब तू एक झमेला।
माँ ही एक माँ, बेटी और दोस्त का फर्ज़ पहचानती है।
छुपन छुपाई में भी तू अगर छिप जाता था,
तो भी माँ का बुरा हाल हो जाता था,
दरवाजे पर बैठ कर जो करती तेरा इंतजार,
उसी दरवाजे से निकाला तूने उसको और सोचा भी ना एक बार।
बचपन में तुम्हारे लिये जिसने इतना दुःख झेला,
उसी माँ को समझता है, अब तू एक झमेला।
बचपन में जब तू करता था सवाल,
माँ भी उत्तर देती थी बार बार
आज जब माँ ने किया तुमसे एक सवाल ,
तूने कहा उससे मत करो परेशान बार बार
मगर आज भी कहीं वो माँ तेरे लिये दुआ करती है,
तेरे खुश रहने की कामना बार बार करती है।
माँ भी उत्तर देती थी बार बार
आज जब माँ ने किया तुमसे एक सवाल ,
तूने कहा उससे मत करो परेशान बार बार
मगर आज भी कहीं वो माँ तेरे लिये दुआ करती है,
तेरे खुश रहने की कामना बार बार करती है।
2.
ढल गया सूरज, ढल गई शाम,
ढल गया एक अनोखा नाम।
नया साल जो देख ना पाई,
बेनज़ीर था उसका नाम।
तात भ्रात की हत्या देख, जो न हुई की निराश
ऐसी महिला के मरने की न थी अभी किसी को आस।
इतनी खुशी के माहौल में लगी थी जिसको इतनी गोली,
जिसने भी मारा था उसको खेली उसने खून की होली।
ढल गया सूरज, ढल गई शाम,
ढल गया एक अनोखा नाम।
नया साल जो देख ना पाई,
बेनज़ीर था उसका नाम।
तात भ्रात की हत्या देख, जो न हुई की निराश
ऐसी महिला के मरने की न थी अभी किसी को आस।
इतनी खुशी के माहौल में लगी थी जिसको इतनी गोली,
जिसने भी मारा था उसको खेली उसने खून की होली।
रोते थे बच्चे और पति रोते थे उसके,
मरने पर दहला था पूरा देश जिसके।
मरने पर दहला था पूरा देश जिसके।
काँपी धरती हृदय हिल गए,
सब लोगों के दिल दहल गए।
नीला सूट सफेद चुन्नी, गले में ओढ़े दुशाला,
गुलाब और चमेली की पहनी थी जिसने माला।
सोचा था जिसने कि देखेगी वो नया साल,
क्या पता था उसे कि पास आ रहा है उसका काल।
सब लोगों के दिल दहल गए।
नीला सूट सफेद चुन्नी, गले में ओढ़े दुशाला,
गुलाब और चमेली की पहनी थी जिसने माला।
सोचा था जिसने कि देखेगी वो नया साल,
क्या पता था उसे कि पास आ रहा है उसका काल।
आज हमारे बीच नही है वो बहादुर बाला,
जिसने हमेशा पहनाई पाक को सम्मान की माला....!
जिसने हमेशा पहनाई पाक को सम्मान की माला....!
21 comments:
इतनी छोटी उम्र मे विचारों को कविता मे बखूबी उतारा है अनन्या ने।
अनन्या को आशीर्वाद कि वो सफलता की ऊँचाइयाँ छुए।
pyaari sii ananyaa ko dher saaraa aashirvaad.....likhtii rahey..khiltii rahey....
ANANYA TUMNE BAHUT ACCHA LIKHA HAI AUR AISA HI LIKHTI RAHO AISI MERI KAMNA HAI APNE BHAVO KO LEKHNI ME THIK SE UTARA HAI
बहुत खूब । हमारा आशीर्वाद पहुंचाईये
अनन्या को आशीष. सच में मन प्रसन्न हो गया कंचन जी. बच्ची की ये सोच ..... और ये अभिव्यक्ति .... वाह !
मेरी तरफ से भी बिटिया रानी को शुभकामनाएं कहें और हां ये भी कहें कि तुम जितनी सुंदर और प्यारी नजर आती हो उतनी ही सुंदर कविताएं भी लिखती हो । ईश्वर तुम्हारी कलम को और निखार दे ।
नन्ही सी नाज़ुक सी कालिका को,
आशा से भरा संसार ,
सपने सच होने का विस्तार ...
स्नेह सहित,
- लावण्या
har umr ka ek apna aasman hota hai......in kavitayo ka bhi hai.
इस उम्र में ऐसे विचार और ऐसी अभिव्यक्ति की काबलियत, धन्य है बिटिया, खुश रहे
बेनज़ीर भुट्टो को समर्पित कविता पसंद आई। आशा है उसकी लेखनी आगे भी फलती फूलती रहेगी।
all the best
rachna
अनन्या हिमांशी को पूरा आशीर्वाद। वह अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का माध्यम तलाश रही है। आप या कोई भी बेहतरीन कवि उसे रास्ता दिखा सकता है उस की कला और प्रतिभा को तराश सकता है उसे यह अवसर दीजिए।
आप सभी का धन्यवाद....अनन्या बहुत उत्साहित है, देर रात तक आप सब की टिप्पणियाँ पढ़ती और सहेजती रही...! मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सबका आशीर्वाद उसे उन ऊँचाइयों पर ले जायेगा जहाँ मैं न पहुँच सकी...!
बहुत खूब अनन्या। मुझे थोड़ी देर हो गई आपकी कविता पढ़ने में। इतनी सी उम्र में आप इतना अच्छा सोचती हैं। हमारा आशीर्वाद आपके साथ है।
अनन्या को अमित शुभकामनायें ....
प्यारी बिटिया की प्यारी कविताएँ ...दोनों ने ही मन मोह लिया. ढेरों शुभकामनाएँ पहुँचें.
वाह! बिटिया की दोनों रचनाएं भावनाओं से ओत-प्रोत, मन की भावनाओं को बड़े ही सुंदर ढंग से उजागर करती हुई, सुंदर शब्दों के सहारे मर्म को छू गईं।
"माँ का अर्थ तुम क्या जानो वो तो माँ ही जानती है,"
बहुत सुंदर।
यदि आशीर्वाद शब्द में सार्थकता है तो एक दिन अवश्य ही साहित्य-जगत में बिटिया का विशेष स्थान होगा। ढेरों शुभकामनाएं।
naam ke anurup
bahut kavyatmak soch
aapka varadhast .......
kaun rokega unchaaiyon ko naapne se
bahut pyaar,kalam ki jeet ho
all the best toananya
" अनन्या बेटे ,
जीती रहो, खुश रहो, "
इसी तरह ,
आपकी कलम
सुन्दर भावों को उजागर करती रहे
ये मेरी प्रार्थना है ...
आप पर ये जिम्मेदारी है के
शाश्वत संस्कारों के विचार
इसी तरह कलम्बध्ध करतें रहें
बहुत सुन्दर कवितायेँ लिखी है आपने ...
स्नेहभरे आर्शीवाद के साथ
- - लावण्या
अनन्या बेटी खूबसूरत कविताएँ-- माँ सरस्वती का आशीर्वाद तुम्हारे साथ है--बस लिखती रहो.
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