Wednesday, March 12, 2008

इसीलिये तो.......!गीतकार नीरज की एक और रचना


लीजिये पढ़िये मेरे प्रिय गीतकार नीरज की एक और रचना जो मुझे बेहद प्रिय है......

इसीलिये तो नगर नगर बदनाम हो गये मेरे आँसू,
मै उनका हो गया कि जिनका कोई पहरेदार नही था।

जिनका दुख लिखने की खातिर,
मिली न इतिहासों को स्याही,
कानूनो को नाखुश कर के,
मैने उनकी भरी गवाही।

जले उमर भर फिर भी जिनकी
अर्थी उठी अंधेरे मे ही
खुशियों की नौकरी छोड़कर,
मै उनका बन गया सिपाही,

पदलोभी आलोचक कैसे, करता दर्द पुरस्कृत मेरा,
मैने जो कुछ गाया उसमें करुणा थी श्रृंगार नही था।

मैने चाहा नही कि कोई,
आकर मेरा दर्द बँटाये,
बस यह ख्वाहिश रही कि
मेरी उम्र जमाने को लग जाये,

चमचम चूनर चोली पर तो
लाखों ही थे लिखने वाले
मेरी मगर ढिठाई मैने
फटी कमीजों के गुन गाये,

इसका ही यह फल है शायद कल जब मैं निकला दुनिया मे
तिल बर ठौर मुझे देने को मरघट तक तैयार नही था।

कोशिश भी की किंतु हो सका,
मुझसे यह न कभी जीवन में,
इसका साथी बनूँ जेठ में,
उससे प्यार करूँ सावन में,

जिसको भी अपनाया उसकी
याद संजोई मन में ऐसे
कोई साँझ सुहागिन दीवा
बोले ज्यों तुलसी पूजन में

फिर भी मेरे स्वप्न मर गये अविवाहित केवल इस कारण,
मेरे पास सिर्फ कुंकम था कंगन पानीदार नही था।

दोषी है तो बस इतनी ही
दोषी है मेरी तरुणाई,
अपनी उमर घटा कर मैने
हर आँसू की उमर बढ़ाई

और गुनाह किया है कुछ तो
इतना सिर्फ गुनाह किया है
लोग चले जब राजभवन को
मुझे याद कुटिया की आई

आज भले कुछ भी कहलो तुम, पर कल विश्व कहेगा सारा
नीरज से पहले गीतों में कुछ भी था पर प्यार नही था।


नोटः नीरज से संबंधित मेरी पिछली पोस्ट आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

8 comments:

मीत said...

वाह ! बहुत अच्छी रचना. मैं भी "नीरज" का लिखा एक बहुत खूबसूरत फ़िल्मी गीत पोस्ट करने का मन बना रह था. देखता हूँ कब .... बहरहाल इस कविता के लिए शुक्रिया.

Awadhesh Singh Chouhan said...

BAHOOT HI SUNDER RACHNA KE LIYE DHANYWAD KE SATH ME AASHIRWAD

DR.ANURAG ARYA said...

aap nahi janti ki neraj mere priya rachnakaro me se ek rahe hai..unke kuch geet to amar hai...is geet ko bantne ke liye shukriya.....

Udan Tashtari said...

वाह!! हमारी पसंद आपने कैसे जानी..बहुत खूब. आभार इसे पेश करने का.

अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi said...

नीरज एक ऐसे शख्स का नाम है जिसे जितना भी पढ़ो ,मज़ा दुगुना हो जाता है. किसी भी शैली की ,किसी भी रस की रचना हो, नीरज का कोई जवाब नही. मेरे भीए प्रिय रचनाकार हैं नीरज जी.
धन्यवाद रचना प्रस्तुति हेतु.

sidheshwer said...

नीरज जी की रचना पढकर मन प्रसन्न हो गया.उन्होने फ़िल्मों के लिये भी बहुत लिखा है अपनी पसंद का एक आडियो लगा दें तो मेरी शाम बन जायेगी.
"जाने क्या बात है नीरज के गुनगुनाने में'
और-
अच्छा लगा आपके ब्लागिस्तान में आकर .फ़िर आऊंगा .बधाई

महावीर said...

नीरज की 'मैं पीड़ा का राजकुंवर हूं' और इस उत्कृष्ट रचना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद और आभार! बस नीरज की रचनाओं का यह क्रम चलता रहे। पढ़ कर बार बार पढ़ने
का दिल करता है।

ajay kumar jha said...

neeraj ko aapke maadhyam se padhna ek sukhad anubhav raha mere liye to.