Monday, December 22, 2008

कि तुम हो मेरे गिर्द...


दिल के किसी कोने से आई आवाज़


"काश कि तुम होते "


तो बोल उठी ज़ुबाँ...


"तो..?.....तो क्या होता...????"


"कुछ नही......! बस ये अहसास .....!

कि तुम हो मेरे गिर्द....!"
किसी ने दिया जवाब ....!!!!!!

30 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

"कुछ नही......! बस ये अहसास .....!
कि तुम हो मेरे गिर्द....!"

सुन्दरतम रचना !

मोहिन्दर कुमार said...

इस अहसास को थोडा और विस्तार देते... सुन्दर ख्याल है

विनय said...

बहुत ही बढ़िया

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http://prajapativinay.blogspot.com/

Hyderabadi said...

आप के ब्लॉग को पढ़ना बहुत अच्छा लगा.

Meenu khare said...

सुन्दर रचना !

Meenu khare said...

सुन्दर रचना !

डॉ .अनुराग said...

कही दिल के गहरे से उभरी लगी ये आवाज....भीतर से...

"उदासियों को उठा कागजो पे रखने लगे
कुछ गमजदो ने यूँ बांटा तन्हाई को "

रंजना said...

WAAH !
Bahut khoob.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

क्या खूब लिखती हो - और चित्र भी नाज़ुक सा मासूम सा बडा प्यारा लगा

dr. ashok priyaranjan said...

गागर में सागर
प्रभावशाली रचना

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख िलखा है- आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग-समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

Mired Mirage said...

बहुत सुन्दर ।
घुघूती बासूती

रंजना [रंजू भाटिया] said...

"कुछ नही......! बस ये अहसास ....!

बहुत खूब .दिल से लिखी है बात आपने

सुशील कुमार छौक्कर said...

कितना खूबसूरत अहसास है जी। बहुत ही गहरे से निकलते हैं ये अहसास।
अद्भुत।

सुनीता शानू said...

बस ये अहसास .....!


कि तुम हो मेरे गिर्द....!"
वाह कंचन जी इन दो पंकियों में आपने सब कह दिया...बहुत-बहुत बधाई

Rohit Tripathi said...

mann ki baat likh dali aapne to yeh :-) :-) apne blog pe post kar lu?

रविकांत पाण्डेय said...

वह क्षण जिसमें यह "अहसास" हो जीने योग्य है। इस कविता की खासियत ये है कि कविता के शब्द समाप्त होने के बाद इसके नये अर्थ खुलने शुरू होते है या कहें कि कविता जीवंत हो उठती है।

रवीन्द्र रंजन said...

स‌च है। बात स‌िर्फ अहसास की है। है। किसी के होने का अहसास करना वाकई एक स‌ुखद अनुभव है। खुदा करे हर किसी को हो, किसी के पास होने का अहसास। अच्छी लगी आपकी यह रचना।

स्वाति said...

kanchan ji
namaskar
bahut badhiya ,kintu thoda aur vistarit karti to aur achhi lagti.
(.tippani dene ke liye bahut bahut dhanywad.mujhe bhi aapka email apke blog par nahi mila. mera email hai swvnit@yahoo.co.in)

Vijay Kumar Sappatti said...

bahut sundar abhivyakti,

choti si kavita mein aapne jeevan ka rahashya daal diya ..

aapko bahut badhai ..

vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

श्रद्धा जैन said...

wo mere ird gird hi hai bhaut bada sambal hai bahut sakun dene wala ehsaas bahut kam logon ko milta hai
aapko padna achha lagta hai

creativekona said...

Kanchanji,
Kisi kee smritiyon ko itne kam shabdon men likhana..bahut sundar..abhivyakti..badhai.
Hemant Kumar

ललितमोहन त्रिवेदी said...

गागर में सागर

प्रकाश गोविन्द said...

कुछ कही - अनकही बातें !
कुछ यादें !!
कुछ अहसास !!!

और जिन्दगी है भी क्या ?

नव वर्ष कर्म और चिंतन से परिपूर्ण हो
मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं

सुनील मंथन शर्मा said...

bahut sundar

SWAPN said...

khubsoorat kavita, badhai, thanks for coming on my blog and comments.
swapn

रविकांत पाण्डेय said...

आपके एवं आपके प्रियजनों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

आकांक्षा***Akanksha said...

नया साल...नया जोश...नई सोच...नई उमंग...नए सपने...आइये इसी सदभावना से नए साल का स्वागत करें !!! नव वर्ष-२००९ की ढेरों मुबारकवाद !!!

गौतम राजरिशी said...

मैं समझ नहीं पा रहा कि ये अद्भुत कविता इतने पहले आपने पोस्ट की और मेरे ब्लौग पर ये अपडेट क्यों नहीं हुआ...
खैर इससे हुआ ये कि इस नये साल की शुरूआत अच्छी हो गयी,,,,,ढ़ेरों शुभकामनायें आपको कंचन जी,ईश्वर करें ये वर्ष आपके लिये समस्त खुशियां लेकर आये और हम आपकी लेखनी के और नये चमत्कारों से परिचित होते रहें

मुकुंद said...

कंचन मैंने आपको आज पहली बार पढ़ा है........

आप ने लिखा है--

दिल के किसी कोने से आई आवाज़




"काश कि तुम होते "




तो बोल उठी ज़ुबाँ...




"तो..?.....तो क्या होता...????"




"कुछ नही......! बस ये अहसास .....!


कि तुम हो मेरे गिर्द....!"
किसी ने दिया जवाब ....!!!!!!


यह एहसास ही तो होते हैं जो आदमी को जिंदा रखते हैं.....


और आपने अमृता प्रीतम का जिक्र किया है तो मुझे भी रसीदी टिकट याद आया
उसमें उनके और साहिर के पाक रिश्ते का जिक्र तो आपने पढ़ा ही होगा. काला गुलाब, लाल गुलाब और सफेद गुलाब का संदर्भ भी याद होगा..........


आप बहुत संवेदनशील जान पड़ती हैं........

अभिषेक ओझा said...

ये नाजुक अहसास पसंद आया !

नववर्ष की शुभकामनायें.