Saturday, February 14, 2009

साथी तेरे नाम एक दिन जीवन कर जायेंगे--सुनिये मेरे साथ ये ढाई आखर महसूसता गीत



साथी तेरे नाम एक दिन जीवन कर जायेंगे--सुनिये मेरे साथ ये ढाई आखर महसूसता गीत

ये वो गीत है, जो मेरे लिये प्रेम के समर्पण का प्रतीक है...! कुछ कहने की ही बात नही बस महसूस करने की...! सब के लिये..जिन्हे भी चाहो, जिन्हे भी मानो,
अपने पहले प्यार दीदी से ले कर बच्चों तक...! बस गाती हूँ और झूमती हूँ, महसूस करती हूँ, गूँगे का गुड़...आप भी सुनिये ना....!ये गीत लिया गया है फिल्म उस्तादी उस्ताद से , गीतकार हैं दिलीप ताहिर, संगीतकार हैं राम लक्षमण और सुरों से सजाया है भूपेन्द्र और आशा भोसले ने....! (विविध भारती स्टाईल) वैसे इसमें नेट में अलग अलग स्थान पर अलग अलग जानकारी मिली है इस गीत के गीतकार संगीतकार के विषय में, जिन्हे सही पता हो वे कृपया बताए





साथी तेरे नाम एक दिन जीवन कर जायेंगे,
जीवन कर जायेंगे
तू है मेरा खुदा, तू ना करना दगा,
तुम बिन मर जायेंगे, तुम बिन मर जायेंगे...

पूजता हूँ तुझे पीपल की तरह,
प्यार तेरा मेरा, गंगा जल की तरह,
धरती अम्बर में तू, दिल के मंदर में तू
फूल पत्थर में तू और समंदर में तू

तू है मेरा खुदा, तू ना करना दगा
तुम बिन मर जायेंगे

खुशबुओं की तरह तू महकती रहे,
बुलबुलों की तरह तू चहकती रहे,
दिल के हर तार से आ रही है दुआ,
तू सलामत रहे बस यही है दुआ

27 comments:

मीनाक्षी said...

बहुत खूब....यही मस्ती जीना आसान कर देती है.... जो इस मस्ती के नशे मे डूब जाता है बस उसकी ज़िन्दगी मज़े मे कटती है...
सदा खुश रहो..

मीनाक्षी said...

बहुत खूब....यही मस्ती जीना आसान कर देती है.... जो इस मस्ती के नशे मे डूब जाता है बस उसकी ज़िन्दगी मज़े मे कटती है...
सदा खुश रहो..

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत मस्ती मे डुबोने वाला गीत. धनय्वाद.

रामराम.

योगेन्द्र मौदगिल said...

भावपूर्ण गीत है कंचन और शायद मुकद्दर का सिंकदर फिल्म का है. बेहतरीन प्रस्तुति..

सतीश सक्सेना said...

बहुत भावपूर्ण गीत !

anitakumar said...

सच है प्रेम समर्पण , प्रेम है पूजा, प्रेम है जीवन , बहुत सुन्दर गीत

Parul said...

गूँगे का गुड़...:) geet khuub pasand kaa

सुशील कुमार छौक्कर said...

सच्ची आपकी पसंद बहुत ही अच्छी हैं।

कंचन सिंह चौहान said...

गीत पसंद करने के लिये आप सभी का धन्यवाद ....!

योगेंद्र जी पहले फिल्म का नाम नही लिखा था, अब लिख दिया है, कष्ट के लिये क्षमा...!

डॉ .अनुराग said...

गाना सुनकर मन में दो नन्हे बच्चो की छवि याद आ जाती है .....ओर चित्रहार भी...शुक्रवार ओर बुधवार भी

Manish Kumar said...

अच्छा लगता है ये गीत सुनने और खास कर इसका मुखड़ा गुनगुनाने में !

कुश said...

chitr hi mohit kar deta hai.. gana to sun nahi pa raha hu :(

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत प्यारा गाना है यह चित्र तो मनमोहक है ही

पंकज सुबीर said...

ये गीत मेरे जैसे कई लोगों की सुधियों में बसा है । आपने जोजानकारी दी है वही सही है ये उस्‍तादी उस्‍ताद से का ही गीत है मेरे पास इसका एलपी रिकार्ड हुआ करता था और इसके दो वर्जन थे । बहुत दिनों बाद सुना ये गीत

अमिताभ श्रीवास्तव said...

सच कहू तो मज़ा आ गया. गीत और गीत के शब्द गहरे अर्थ रखते है.
आपके बाबूजी और आपके साथ माताजी की दुर्लभ तस्वीर ने मुझे ज्यादा आकर्षित किया.
आपके उनके प्रति प्रेम से भी में प्रभावित हूँ.
इश्वर आपको खुशिया देता रहे. ..
मेरी एक कविता है मेरे ब्लॉग पर
माता- पिता की तस्वीरे देखकर आपके लिए लिखना चाहता हूँ

"जिसके शीश
हाथ पिता का
और माता की
आँचल छाया,
उसके जीवन सागर- मंथन में,
भाग सदेव,
अमृत ही आया। "

धन्यवाद गीत के लिए ..समय मिले तो
मेरे ब्लॉग पर भे नज़रे इनायत कीजिये

गौतम राजरिशी said...

शुक्रिया कंचन...
और जल्द ही जी-मेल में अकाऊंट खोल कर आपको मेल करता हूँ

महामंत्री - तस्लीम said...

बहुत सुन्दर, सुनकर मजा आ गया।

समीर सृज़न said...

पूजता हूँ तुझे पीपल की तरह,
प्यार तेरा मेरा, गंगा जल की तरह,
धरती अम्बर में तू, दिल के मंदर में तू
फूल पत्थर में तू और समंदर में तू

तू है मेरा खुदा, तू ना करना दगा
तुम बिन मर जायेंगे...
बिल्कुल सही फ़रमाया आपने...ऐसे नाज़ुक मामले में अक्सर शब्द गीतों का रूप ले लेता है...

kumar Dheeraj said...

खुशबुओं की तरह तू महकती रहे,
बुलबुलों की तरह तू चहकती रहे,
दिल के हर तार से आ रही है दुआ,
तू सलामत रहे बस यही है दुआ
कंचन जी आपकी ये प्रविष्टि बेजोर है ...आपने जीवन में सत्य के पथ पर चलकर जो मन में ठाना है उसमें आप जरूर सफल होंगी । बढ़िया लिखती है आप शुक्रिया

MUFLIS said...

achha geet hai....
geetkaar ke roop mei Dilip Tahir ka naam hairaan kar gya,
i never knew him as a poet/lyricist
thanks..!
kabhi koi purana geet sunvaayiye,
JahaanAra, BaavreNain, ya koi aur..
---MUFLIS---

Mumukshh Ki Rachanain said...

दिल के हर तार से आ रही है दुआ,
तू सलामत रहे बस यही है दुआ

आज के युग में उक्त पंक्तिया शायद प्रेम -गीतों का अंश भर बन के रह गया है वरना आज तो हर कोई डसने के लिए मधुर बांसुरी बजता ही मिलता है और बजाते -बजाते कब डस कर चल देता है पता ही नही चलता...........
फिर सलामत रहो यही दुआ ही कहते लोग फ़िर मिल जायेंगे पर सलामती को पुख्ता बंदोबस्त करेगा कोई नही

चन्द्र मोहन गुप्त

अभिषेक said...

तू किसी और की, जागीर है ऐ जान ए गज़ल

is qawwali ke comments check karein maaf kijiye aur koi raasta nahin dikha sampark ka ..

दिगम्बर नासवा said...

बहुत दिनों के बाद इस गीत को सुन कर कुछ पुरानी यादें उभर आयीं
शुक्रिया इस गीत के लिए

Vijay Kumar Sappatti said...
This comment has been removed by the author.
Vijay Kumar Sappatti said...

Kanchan ji

aapke post men ye geen sunkar bahut kuch yaad aa gaya .

ye geet bahut be bhaavpoorn hai .

aapko badhai , is pratuthi ke liye .

aapko shivraatri ki shubkaamnaayen ..

Maine bhi kuch likha hai @ www.poemsofvijay.blogspot.com par, pls padhiyenga aur apne comments ke dwara utsaah badhayen..

. said...

bahut-bahut dhanyaad!
--ashok lav

cg4bhadas.com said...

छत्‍तीसगढ के विचार मंच में आपक स्‍वागत, है अगर आपके कोई भी खबर या जानकारी है जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सम्बन्ध छत्तीसगढ से है तो बस कह दीजिये हमें इंतजार है आपके सूचना या समाचारों का घन्यवाद