मैने वादा किया था कि माँ के पसंदीदा गीत के साथ दोबारा मिलूँगी असल में एक गीत के कारण वो पोस्ट रह जा रही थी जिसे हमने आईपॉड पर रिकॉर्ड किया था और उसमें वायरस के कारण कंप्यूटर पर सेव नही कर पा रही थी।
मेरे भईया के मित्र और माँ के मानस पुत्र नीरज भईया ये गीत बहुत अच्छा गाते हैं। नीरज भईया कैरियर क्षेत्र में मेरे प्रेरणा श्रोत भी हैं। जब मैंने इण्टरमीडिएट की परीक्षा पास की, उसी समय नीरज भईया की जॉब हिन्दुस्तान पेट्रोलियम में हिंदी अनुवादक के पद पर लगी थी और भईया ने मुझे भी यही तैयारी करने की सलाह दी और मैने स्नातक परीक्षा में इसी अनुसार विषय लिये। भईया ने मुझे एक टाइप राइटर भी ला कर दिया और अनुवाद की तैयारी का सबसे बढ़िया तरीका ये बताया कि रोजगार समाचार के दोनो वर्ज़न मँगाया करो। जब एक साल तक मैं हिंदी ही वर्ज़न मँगाती रही तो उन्होने खुद हॉकर को अंग्रेजी वर्ज़न मेरे घर डाल कर पेमेंट उनसे लेने को कह दिया और ये उनका मेरे प्रति सत्य स्नेह ही था शायद कि वो पेपर जब पहली बार मेरे घर आया तो दोबारा मुझे मँगाने की जरूरत नही पड़ी क्योंकि इसी पेपर मे मेरे चुने जाने का परिणाम आया था। :)
तो नीरज भईया ने हिदुस्तान पेट्रोलियम के वार्षिक समरोह में ये गीत गाया तो अधिकतर लोगों की आँखें नम हो गईं और ये किस्सा सुनाते हुए जब भईया ने ये गीत अम्मा को सुनाया तो फिर अम्मा ने फोन पर मुझे बताया कि कंचन मेरे कान में ये गीत सुबह शाम गूँजता रहता है.........मै समझ सकती थी।
तो उनके जन्मदिन पर इससे अधिक भला उपहार हो ही क्या सकता था नीरज भईया द्वारा...! लीजिये सुनिये आनंदबक्षी के बोलो से सजा लक्ष्मीकात, प्यारेलाल का संगीतबद्ध किया हुआ ये गीत पहले नीरज भईया (पार्टी के शोर के साथ)
13 comments:
कंचन जी, मुझे बहुत पसंद है यह गीत।
शुक्रिया....
गाने तो सुन नही पाऊँगा .. हेड फ़ोन नही है पर.. साइड बार में जो आपने राधा कृष्ण की तस्वीर लगाई है.. उसने असीम आनंद की प्राप्ति करा दी... बहुत ही सुंदर है..
बहुत सुंदर है यह गीत ..अच्छा लगा सुनना
पोस्ट तो कल ही पढ़ ली थी... शायद आपने पब्लिश करते ही हटा दिया था, रीडर में पडा था. बस गाने नहीं सुन पाया था उसमें. बहुत अच्छी लगी ये प्रस्तुति.
bahut sundar geet
गाना सुन नहीं पा रहा हूं. कंप्यूटर में कुछ छेड़छाउ़ कर दी बच्चों ने. बाद में सुन लूंगा. बहरहाल पढ़ने में अच्छा है. शेष शुभ.
सुँदर गीत सुँदर चित्र बहुत पसँद आये हमारी शुभकामनाएँ आपके नीरज भाई साहब के लिये..
कँचन शुक्रिया !
-लावण्या
main nahi sun pa raha hun ye on nahi ho raha hai pata nahi ku par pyasrat rahunga...
पहली बार यहाँ टिप्पणी कर रहा हूँ। बड़ा आत्मीय माहौल है यहाँ। आता रहूंगा। आपको बधाई, इस प्यारे गीत के लिए।
बचपन में सोचा करता था कि बड़ा होकर मोहम्मद रफ़ी बनुंगा....ये गाना अक्सर गुनगुनाया करता था मैं भी.शुक्रिया फिर से उन यादों को ताजा करने का
और आप टिप्पणीयां जारी रखें,गुस्ताखी माफ़
दूसरा गाना तो मेरा भी फेवरेट है.......गुलाम अली की आवाज में .....मेरे मोबाइल में भी है......आप इतने होनहार ओर अच्छे लोगो के साथ है......तभी अच्छी है...ऐसे ही बनी रहिये .....
गाना नहीं सुन पाया। एक अच्छी प्रस्तुति जिसमें घरेलू वातावरण सा बन गया है जो बहुत अच्छा लगता है।
Bouth Aacha
visit my site
www.discobhangra.com
Post a Comment