Saturday, June 7, 2008

एक बात



मेरी संगीत अध्यापिका और मेरी आदर्श सुश्री शशि पाण्डेय पिछले दो हफ्तों से जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं, जिसमें जीत मौत की ही होनी है। हम हाथ बाँधे खड़े हैं, ये भी नही समझ पा रहे कि प्रार्थना क्या करे...! उन्होने अपनी जिंदगी कि एक भी साँस अपने लिये नही जी...! आज उन्हे पैंक्रियाज़ मे कैंसर है....! इन सब स्थितियों से जब निकलूँगी तब फिर से आप से मिलूँगी..!

9 comments:

DR.ANURAG ARYA said...

ishvar se prathna hi ki ja sakti hai...

Manish said...

चमत्कार होते हैं..कम ही सही पर उम्मीद का दीया जलाए रखिए..

रवीन्द्र रंजन said...

बेशक उम्मीद का दामन आखिर तक नहीं छोड़ना चाहिए। हम भी यही उम्मीद करेंगे कि कोई चमत्कार हो जाए और सब कुछ ठीक हो जाए।

Lavanyam - Antarman said...

आपकी पीडा
समझ रही हूँ :-((
ईश्वर की कृपा रहे -
स स्नेह्,
- लावण्या

Udan Tashtari said...

उपर वाले पर भरोसा रखें. हताशा को पास न आने दें. प्रार्थना करें. हम भी प्रार्थना करते हैं.

कंचन सिंह चौहान said...

now pl pray for her soul. She has left the world at 11.30 p.m. n I'm waiting for dawn...!

yunus said...

भगवान उनकी आत्‍मा को शांति दे ।

राकेश जैन said...

jo jeev is jeevan me aakar parmarth se laga tha, wo jeev nishchit hi sadgati me gaman kar raha hoga.. unki nav yatra ke lie shubhechhayen...aur aapke jeevan me hui riktita ke lie samvedna..

रवीन्द्र रंजन said...

bagwan unki aatma to shanti pradan kare. yahi duha nai.