Wednesday, May 14, 2008

सुनो आतंकवादियों


आजकल नासिरा शर्मा की नारी विमर्श पर लिखी किताब औरत के लिये औरत पढ़ रही हूँ। नासिरा शर्मा आधुनिक कथाकारों में विशेष स्थान रखती हैं एवं देश विदेश के कई सम्मानों से अलंकृत हो चुकी हैं, जिसके विषय में हम फिर विस्तार से चर्चा करेंगे...

फिलहाल किताब में संघर्ष के बीच निकलेगी सफलता की राह शीर्षक के अंतर्गत उल्लिखित एक कविता आपसे बाँटने का मन है जो कि अशोक 'लव' द्वारा लिखित कविता 'अधिकार' की पंक्तियाँ हैं। लिखा तो ये आज की नारी के ऊपर गया है लेकिन जयपुर बमकांड के बाद आतंकवादियों से भी मुझे यही कहना है।

बाजों के पंजों में

चिड़ियों का मांस देख

नही छोड़ देती चिड़िया

खुले आकाश की सीमाएं नापना

उड़ती है चिड़िया

खुले आकाश की सीमाएं नापने

उड़ती है चिड़िया

गुँजा देती है आकाश का कोना कोना

बाज चाहे जिस भी गलतफहमी मे रहे

चिड़िया नही छोड़ती

आकाश पर अपना अधिकार


10 comments:

Manish said...

कविता बाँटने के लिए शुक्रिया!

प्रभाकर पाण्डेय said...

बाजों के पंजों में

चिड़ियों का मांस देख

नही छोड़ देती चिड़िया

खुले आकाश की सीमाएं नापना ।

बहुत ही तार्किक रचना लाई हैं आप। धन्यवाद, बाँटने के लिए।

Rachna Singh said...

http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/
kanchan see this blog and let me know if i should send invite to you

Parul said...

चिड़िया नही छोड़ती

आकाश पर अपना अधिकार

sahi to hai..thx

DR.ANURAG ARYA said...

चिड़िया नही छोड़ती

आकाश पर अपना अधिकार

नासिर शर्मा को तब से ज्यादा पढ़ा जब वे नया ज्ञानोदय के एक विवाद मे फंसी.....उससे पहले यदा कदा ज्ञानोदय ओर हंस या कथ्देश मे उनकी कुछ कहानिया पढी थी ओर प्रभावित हुआ था.....कविता बाँटने का शुक्रिया....

रवीन्द्र रंजन said...

बहुत ही सही मौके पर सही बात का जिक्र किया है आपने।

गुँजा देती है आकाश का कोना कोना

बाज चाहे जिस भी गलतफहमी मे रहे

चिड़िया नही छोड़ती

आकाश पर अपना अधिकार

मीत said...

बहुत सही लिखा है ..... अच्छी पोस्ट ... अच्छी कविता ... और एकदम सटीक मौक़ा.

Lavanyam - Antarman said...

आपने सही लिखा है -- Timely post - well done.
लावण्या

Udan Tashtari said...

कविता बहुत उम्दा लगी. सबके साथ बांटने के लिए आभार.

Anonymous said...

aapke madhyam se mujhe apnee kavita parhne ka avsar milaa. main nahin jaantaa thaa ki nasira sharma jee ne apne upnyas mein meri ADHIKAR kavita udhrit kee hai.apka aabharee hoon.nasira jee se mere parivarik sambandh rahe hain.unke donon bachhe mere vidyarthhee bhee rahe hain. unka bhee dhanyaad!pathakon ne kavita kee prashansa kee hai unka dhanyaad.
*ashok lav ,8.8.08,ashok_lav1@yahoo.co.in