कंचन जी इस बेहतरीन रचना और कमाल के चित्र के लिए बधाई ...लेकिन असली बाज़ी मारी है कुश ने अपने कमेन्ट से...हंसी अभी तक नहीं थम रही...बहुत शैतान हो गया है बच्चा... नहीं ?
कुछ सूझ नहीं रहा कि क्या लिखूं। पहले तो ये रात-बिरात चैटियाना बंद करो नेट पर और समय का सदुपयोग करो कुछ क्रियेटिव राइटिंग के लिये। बहुत ढ़ील मिल रही है तुम्हें भाईयों से...
सिर्फ देर की चैटिंग का ये असर है, जो तुम्हे इस तरह की क्रिएटिव लिखने को प्रेरित करता है तो मेरे तरफ से छूट है , मगर ....... वो अकड़ वाली बात आने मत देना ... :) :)
अच्छा है... पर खत की तो बात ही कुछ और है..सुना है खत में लोग कलेजा भी निकाल के रख देते हैं...व्यक्तिगत तौर पर मुझे चैट फ़ास्ट-फ़ूड जैसा लगता है जबकि खत देसी भोजन जैसा...शेष अपनी-अपनी रूचि...ऊपर छायाचित्र भी सुंदर लगा।
34 comments:
एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !
waese print out ki jagah content ko cut copy paste karke sms kar do mobile par aur phir raat biraat kyaa jahaa chao wahaa padho
dear kanchan
vaah ye andaaz bhi badhiya hai.
खाली जी करता है एच नहीं करता..?
कंचन जी इस बेहतरीन रचना और कमाल के चित्र के लिए बधाई ...लेकिन असली बाज़ी मारी है कुश ने अपने कमेन्ट से...हंसी अभी तक नहीं थम रही...बहुत शैतान हो गया है बच्चा... नहीं ?
नीरज
अकविता..यूं ही...
या फिर
यूं ही..अकविता...???
कुछ सूझ नहीं रहा कि क्या लिखूं। पहले तो ये रात-बिरात चैटियाना बंद करो नेट पर और समय का सदुपयोग करो कुछ क्रियेटिव राइटिंग के लिये। बहुत ढ़ील मिल रही है तुम्हें भाईयों से...
Didi....a nice as u said "akavita".......alluring!
चित्र और अ-कविता दोनों एक दुसरे की पूरक है...दोनों एक दुसरे को सार्थक किये दे रही हैं..
वो जो ख़त तूने मुहब्बत में लिखे थे मुझको..
बन गये आज वो साथी मेरी तन्हाई के...:-)
इस अकविता को दो पंक्तियों पर नहीं रोकना था.
beautiful thought .
zealzen.blogspot.com
सिर्फ देर की चैटिंग का ये असर है, जो तुम्हे इस तरह की क्रिएटिव लिखने को प्रेरित करता है तो मेरे तरफ से छूट है , मगर ....... वो अकड़ वाली बात आने मत देना ... :) :)
अर्श
अच्छा लिखा है ........
कुछ लिखा है, शायद आपको पसंद आये --
(क्या आप को पता है की आपका अगला जन्म कहा होगा ?)
http://oshotheone.blogspot.com
very good.
जी करता है इसे चुरा कर किसी को भेज दूं ये कहते हुए कि मैंने लिखा है तुम्हारे लिए :)
है तो शानदार...
सही है .... प्रिंटआऊट निकालकर...
गजब.. मोबाईल पर चैट खोलकर सिराहने रखकर भी सोया जा सकता है, नहीं.... आधुनिक सोच से...
दिलचस्प.....जैसे किसी मेसेज को संभालना इन्बोक्स में कई दिनों तक
सुंदर रचना.
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अरे, वाह! बहुत सुंदर!
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चेट ही नहीं यह फोटो भी सिहराने रखने लायक है... :-)
चैट-चपाटे का इतिहास क्या इतना प्रभावी ट्राँक्युलाइज़र होता है । मालूम न था, अपने कुछ करीबियों को ट्राई करने को बोलता हूँ ( सुन रहे हो.. कुश ? )
अच्छा है... पर खत की तो बात ही कुछ और है..सुना है खत में लोग कलेजा भी निकाल के रख देते हैं...व्यक्तिगत तौर पर मुझे चैट फ़ास्ट-फ़ूड जैसा लगता है जबकि खत देसी भोजन जैसा...शेष अपनी-अपनी रूचि...ऊपर छायाचित्र भी सुंदर लगा।
ओह !
सीधी सादी बात
सच्ची संवेदना का स्पर्श!
आज कल खतों का सिलसिला तो खत्म ही हो गया ...अब चैट से ही काम चलाओ ...मेल नहीं आते ?
वो थोड़े लंबे हो सकते हैं ...
अक्सर सोचा करता हूँ की कविता में इन शब्दों का प्रयोग कैसे किया जा सकता हैं
आज एक उत्तम कविता पढ़ भी ली!!! बहुत अच्छी लगी!!
बढिया
Ah! bahut sunder :)
http://liberalflorence.blogspot.com/
वैसे आजकल थ्रीडी प्रिंटर भी आ रहे हैं.. हो सकता है कुछ दिन बाद आप ’उन्हीं’ का प्रिंट निकाल लें :-)
पुराने ज़माने में जो ख़त चलते थे वो आजकल चैट हो गए हैं, मगर सिरहाने रखने का एहसास तो अब तक वैसा का वैसा ही है.
जब तक कोई जी न ले... बता नही सकता जिन्दगी का स्वाद!
ये जो नया जरिया बना है... बहुत ही खूबसूरत है.
कई बार पढ़ा है स्क्रीन पर ही... ः) ः)
प्रिय कंचन... खुश रहो... यूँ ही हम भी इधर आ पहुँचे और अकविता पढ़ कर मुस्कुरा दिए...अतीत की कुछ यादें ताज़ा हो गईं...
चैट करें - the best one.
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